ये बात है 2015 की जब वर्षा इंजीनियरिंग कॉलेज में गई और उसको पहली बार एंड्रॉयड फोन मिला। मैं एक दिन दुर्गा पूजा के समय उसके दुकान पे गया तो उनके पापा जी ने हमको कहा की अभिनव तुम मेरे घर जाकर वर्षा को मोबाइल चलना सिखा देना..
मैं तो खुश हो गया कि वर्षा से मिलने को मिलेगा जो बहुत दिनों के बाद मिलूंगा। तो मैं उसी टाइम वर्षा के घर गया। उसको देख तो बहुत अच्छा लगा। अब 9th क्लास के समय का अट्रैक्शन वाला समय चला गया था। अब बहुत दिनों के बाद उसको देखा तो बहुत अच्छा लगा। उससे मिला ओर बताया कि अंकल जी भेजे हैं, इत्यादि।
वो उस दिन चाट बनाई थी जो हमको खिलाई। अब हमको वो इतना अच्छा लगा कि मत ही पूछिए। ऐसे भी चाट मेरा फेवरेट डिश है लेकिन उसके हाथों में जादू था या उसके प्यार का कमाल ये तो भगवान ही जाने।
बस.. हमको बहुत अच्छा लगा और ये बात मैंने वर्षा को बताया भी।
खैर उनके मोबाइल में जीमेल बनाना था और भी कुछ बताना था जो मैंने उनको बताया भी। उसके बाद उनके कॉलेज के बारे में पूछा। उनके ब्रांच का सिलेबस भी देखा।
वो मेरे बारे में पूछी कि तुम क्या कर रहे हो तो मैंने अपने बारे में भी बताया।
हम जैसे पहले दोस्त थे वैसे ही दोस्त की तरह अभी भी बात कर रहे थे। लेकिन मेरे दिल में एक तड़प और एक बेचैनी थी। और ये बेचैनी क्यों थी पता नहीं।
“शायद इसी बेचैनी को प्यार कहते हैं।।”
खैर उसके बाद हम छत पर गए.. वो ही बोली थी चलो ऊपर.. फिर हम ऊपर थोड़ी दी बैठे और बात किए। मेरे मन में हो रहा था कि हम नंबर मांगे लेकिन समाज नि आ रहा था कि कैसे मांगे🥲
लेकिन फिर मैं बोला कि वर्षा तुम अपना नंबर दो। फिर वो अपना नंबर दी. . 778195****
फिर थोड़े देर के बाद मैं रिटर्न अपने घर आया।
यहीं से एक नई शुरुआत थी.. शायद हमारे इश्क और प्यार के बीच रेगिस्तान के मिट्टी में गिर चुका था। रेगिस्तान कहने का कारण आपको अगले कहानी में पता चलेगा..
VARSHABHINAV

